Saturday, July 27, 2013

Bhula nahi main abtak gilli dande ka taana

भुला नहीं मैं अब तक वह धागों में मंझे लगाना
खरी धुप में आसमान से  नजरें मिलाके पतंगे निहारना
कटी पतंग के पीछे नंगे पाँव बेबाक दौड़ जाना।
पतंग लूट कर कहीं दूर जाकर छिप जाना
भुला नहीं मैं अब तक वह पतंगे उडाना।।

भोर होने से पहले उठ जाना,
दोस्त के घर चुपके से जाकर उसे आवाज़ लगाना
कंचे उसे दिखाकर उसे घर से भगा ले आना
फिर घंटो वह टूटी मकान के पीछे कंचे भंजाना
भुला नहीं मैं अब तक वह कंचे चलाना।।

दोपहर मां को सोता देख चुपके से किवाड़ी खोलना
दूर के मुख्या के बगान में पहरे लगाना
मौका पाकर एक पत्थर चलाना
और फिर गिरी आम को लुट कर औंधे मुंह भाग  आना।
भुला नहीं मैं अब तक वह बगान लूट आना ।

तोड़े हुए फल को बाँट कर खाना
फिर गिल्ली डंडे की हुंकार भरना
अन्ध्यारे तक गिल्ली को ढूँढना
चोट खाकर भी खेलते रहना
भुला नहीं मैं अब तक वह गिल्ली डंडे का ताना ।।
भुला नहीं मैं अबतक वह गिल्ली डंडे का ताना।।


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